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कश्मीरी युवाओं ने अलगाववाद को दिखाया ठेंगा !

नई दिल्ली: भारतीय विशेषज्ञयों के अनुसार इस वर्ष जम्मू कश्मीर के 70 स्थानीय युवाओं ने आतंकवादी संगठनों का दामन थाम लिया है। इनमें से अधिकांश युवक आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हुए बताये जा रहे है।   लेकिन दूसरी ओर ये कोई नही देखता कि हर वर्ष कितने कश्मीरी युवा  सरकारी महकमे में बढ़ चढ़कर भाग लेते है।

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सृजन घोटाले में लालू करीबी आई॰ए॰एस॰ अधिकारी शामिल

नई दिल्ली: इस समय सबसे ज्यादा चर्चित रहे बिहार के सृजन घोटाला एक नया मोड ले चूका है इस घोटाले की अहम कड़ी मने जाने वाले कल्याण विभाग के कर्मचारी महेश मंडल की भागलपुर मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में मौत हो गई है। 

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महिला विकास के नाम पर करोड़ो की ठगी !

नई दिल्ली:   भागलपुर के अब तक के सबसे बड़े सृजन घोटाले को बिहार के मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार ने गम्भीरता से लेते हुए मामले की जांच को सीबीआई द्वारा  करने की सिफारिश की है। बता दें कि 'सृजन' एक गैर सरकारी संस्था है। जो जिले में महिलाओं के विकास के लिए कार्य करती थी। इसकी संस्थापक और इसके नाम से गोरख धंधे को चलाने वाली मनोरमा देवी थी, जिनका देहांत इस वर्ष फरवरी  माह में हो गया। इस मामले के सामने आते ही मनोरमा देवी के पुत्र अमित कुमार फरार है।

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रिक्शों का कोई जबाब आज भी नहीं

मुझे रिक्शे बचपन से ही बहुत भाते हैं। उसके कोई कारण हैं। पहला, आप कुछ ढंग से देख पाते हैं अगर कुछ देखना चाहें तो, दुसरा, अगर आप सोचना चाहते हैं कुछ ख़ास विषय पे तो वो भी कर सकते हैं खुली हवा में सॉंस भरते हुए, और तीसरा कारण, आप सारे शहर की सोच भी पता कर सकते हैं रिक्शावाले से थोड़ी बातचीत करके। हमें महीं लगता है कि किसी और सवारी में सवार होकर आप कम समय में इतना फ़ायदा उठा सकते हैं। हाँ, एक बात सच है कि और सवारियाँ आपको अपकी झुठी मंज़िल पे मिनटों में अवश्य पहुँचा देंगीं। सोच के मैं बहुत दुखी होती हुँ कि ये सवारी अब विलुप्त होने के कगार पे जा चुकी है, छोटे-छोटे शहरों में भी।

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इतिहास गवाह है कि तिरंगे की रक्षा के लिए संघ के स्वयंसेवकों ने समय-समय पर अपने प्राणों का बलिदान किया है।

वामपंथी-अलगाववादी जुगलबंदी के चलते जेएनयू में लगे देश विरोधी नारों पर जब  देशभर में आक्रोश उठ रहा था उसी समय कांग्रेस के युवराज इन नारों में आगामी विधानसभा चुनावों की हरी-भरी  सम्भावनाएँ तलाश रहे थे। इस चक्कर में वामपंथी धड़ों के साथ कदमताल करते विश्वविद्यालय परिसर जा पहुँचे और "भारत की बर्बादी तक जंग लड़ने" का ऐलान कर रहे जंगजुओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए। मीडिया के कैमरों की चकाचौंध ख़त्म होते-होते कांग्रेस के अंदर ये अहसास गहराने लगा कि राहुल की इस कलाबाज़ी के चलते कहीं पार्टी औंधे मुँह नीचे न आ जाए। लीपापोती पर विचार होने लगा और जब देश के सभी विश्वविद्यालयों में तिरंगा फहराने की बात आई  तो पता नहीं किसके निर्देश पर  कांग्रेस कार्यकर्ता देश में स्थान-स्थान पर संघ कार्यालयों पर तिरंगा  फहराने चल दिए।