रोहिंग्याओं को वापस भेजने के मामले पर ओवैसी-स्वामी आमने-सामने

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भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. भारत ने गुरुवार को पहली बार 7 रोहिंग्याओं को म्यांमार को सौंपा. सुप्रीम कोर्ट में इस प्रक्रिया को रोकने की याचिका भी दायर की गई थी, जिसे CJI ने खारिज किया. इस मुद्दे पर अब राजनीति भी तेज हो गई है.

रोहिंग्याओं के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के सुब्रमण्यम स्वामी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी आमने-सामने आ गए हैं. आजतक से बात करते हुए स्वामी ने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां हर कोई चटाई लेकर आ जाए और बस जाए. उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ हिंदुओं के लिए है.

स्वामी ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमान कभी भी भारत के साथ नहीं रहे, इसलिए उन्हें यहां क्यों रखा जाए. आजादी से पहले वो जिन्ना का गुणगान करते थे. स्वामी बोले कि सभी रोहिंग्याओं को जहाज में भरकर वापस भेज देना चाहिए, ये सभी भारत के लिए बड़ा खतरा हैं.

एक तरफ जहां स्वामी ने रोहिंग्याओं को वापस भेजने की वकालत की है, तो वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी केंद्र पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार शरणार्थियों पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रही है.

उन्होंने कहा कि जो देश UNSC में सीट चाहता है, वह कैसे इस तरह का फैसला ले सकता है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भारत के इस फैसले का विरोध किया है. ओवैसी ने कहा कि UN के महासचिव ने भी इसे नियमों का उल्लंघन बताया है. AIMIM प्रमुख ने कहा कि हम इससे पहले भी तिब्बत, श्रीलंका समेत अन्य देशों के शरणार्थियों को जगह देते आए हैं.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी रोहिंग्याओं के मुद्दे पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीति और नीयत साफ है, हम किसी भी घुसपैठिए को देश में जगह नहीं देंगे. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की वोटबैंक की नीति के कारण देश में घुसपैठिए बोझ बन गए हैं. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये देश की संप्रभुता का सवाल है, इस मुद्दे पर पूरे देश को साथ खड़ा होना चाहिए.

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