भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदों को चुनाव आयोग का झटका एक साथ कराने हों चुनाव तो 1-2 महीने में लें फैसला

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देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदों को चुनाव आयोग से झटका लगा है. चुनाव आयोग का कहना है कि देश में इतने वीवीपैट ही नहीं हैं कि 11 राज्य के विधानसभा चुनाव और देश में लोकसभा चुनाव एक साथ करवाएं जाएं.

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के मुताबिक, अगर 11 राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ करवाने हैं तो इस पर अगले एक-दो महीने में ही फैसला लेना होगा. क्योंकि इसके लिए काफी बड़ी मात्रा में नई वीवीपैट मशीनें ऑर्डर करनी होंगी.

इसके अलावा चुनाव आयोग की ओर से ये भी कहा गया है कि साल के अंत में होने वाले 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ भी लोकसभा चुनाव नहीं करवाए जा सकते हैं. इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एक देश-एक चुनाव पर बयान दिया है. उनका कहना है कि अभी की परिस्थिति में ये संभव नहीं है.

गौरतलब है कि 'एक देश एक चुनाव' के तहत लोकसभा और विधानसभा चुनाव को एक साथ कराने में भले ही मोदी सरकार और चुनाव आयोग के सामने संवैधानिक दिक्कतें हों, लेकिन बीजेपी सूत्रों की मानें तो 2019 में लोकसभा के साथ एक दर्जन राज्यों के विधानसभा चुनाव कराकर 'एक देश एक चुनाव' की दिशा में एक बड़ा उदाहरण पेश कर सकती है.

बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक इसके लिए किसी तरह के संविधान संशोधन या चुनावी नियमों में कोई बड़ा संशोधन करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. लेकिन अब चुनाव आयोग के जवाब के बाद इन अटकलों पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है.

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