मोदी सरकार ने लोकसभा में पेश किया SC/ST संशोधन विधेयक

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SC/ST एक्ट के मुद्दे पर दलित समुदाय की नाराजगी झेल रही मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मोदी सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में एससी\एसटी संशोधन विधेयक 2018 (SC/ST Prevation Atrocity Act Amendment Bill) पेश किया. ये वही बिल है जिसके तहत SC/ST एक्ट अपने पुराने मूल स्वरूप में आ जाएगा.

बता दें कि इसी साल 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट 1989) के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दो अप्रैल को दलित संगठन सड़कों पर उतरे थे. दलित समुदाय ने दो अप्रैल को 'भारत बंद' किया था. केंद्र सरकार को विरोध की आंच में झुलसना पड़ा. देशभर में हुए दलित आंदोलन में कई इलाकों में हिंसा हुई थी, जिसमें एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार मानते हुए दलित समाज केंद्र सरकार से अपनी नाराजगी जता रहा था. केंद्र सरकार और बीजेपी को दलित विरोधी बताया जा रहा था. दलित संगठनों ने सरकार को एक बार फिर अल्टीमेटम दे रखा है कि अगर 9 अगस्त तक एससी एसटी एक्ट को पुराने स्वरूप में लाने वाला कानून नहीं बना तो वो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

सूत्रों की मानें तो एससी\एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18 A जोड़ी जाएगी. इसके जरिए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा. इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट के किए प्रावधान रद्द हो जाएंगे और अब ये प्रावधान होगा-

एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है.आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी, हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी. एससी/एसटी मामले में जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर करेंगे.

जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा. एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी. सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी होगी.

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