RJD स्थापना दिवस पर तेजप्रताप ने कहा, मै पार्टी में सबसे सीनियर नेता

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लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव का तेवर राष्ट्रीय जनता दल के स्थापना दिवस के अवसर पर एक बार फिर से देखने को मिला है. गुरुवार को उन्होंने खुद को पार्टी का सबसे सीनियर लीडर बताया. उनके इस बयान ने राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव समेत कई नेताओं को भी छोटा बना दिया है.

जब 22 साल पहले लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की थी, तब तेजप्रताप यादव महज सात साल के थे. गुरुवार को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पार्टी के तथाकथित असामाजिक तत्वों को एक बार फिर सीमा में रहने की चेतावनी भी दी. इस मौके पर वे प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे पर निशाना साधने से भी नहीं चूके.

तेजप्रताप ने कहा, 'तेजस्वी दिल्ली जाएंगे, तो मैं संगठन संभालूंगा.' मालूम हो कि गुरुवार को पटना में आरजेडी का 22वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित हुआ. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस कार्यक्रम में तेजप्रताप की मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी नहीं पहुंचीं.

जब कार्यक्रम का शुभारंभ हो रहा था, उस समय हर तरफ से तेजप्रताप यादव जिंदाबाद के नारे लग रहे थे. इस अवसर पर तेजप्रताप यादव ने छात्र आरजेडी की हरे रंग की टोपी पहन रखी था यानी तेजप्रताप ने अपनी ब्रांडिंग का पूरा ख्याल रखा. उन्होंने कई मौकों पर बिना लाग लपेट के सीधे कहा कि आरजेडी में छात्र इकाई की उपेक्षा नहीं की जा सकती है.

तेजप्रताप ने यह भी कहा कि कुछ लोग भाई-भाई को लड़ाना चाहते हैं, लेकिन वे (तेजप्रताव) कृष्ण हैं तो तेजस्वी अर्जुन. इस बात को ख्याल रखकर तेजस्वी यादव ने भी मंच पर तेजप्रताप के पैर छूए और आशीर्वाद लिया. तेजप्रताप यादव ने इस कार्यक्रम में एक बार फिर पार्टी में असामाजिक तत्वों की चर्चा की.

उन्होंने कहा, 'ऐसे लोगों को मैं फिर खबरदार कर रहा हूं. तेजस्वी ने मुझसे कहा था कि भाषण को लंबा मत खींचिएगा. उसे दिल्ली जाना है. तेजस्वी दिल्ली जाएगा, तो मैं संगठन चलाऊंगा.' भाषण के दौरान तेजप्रताप ने एक नेता को डांटा और कहा कि क्या खुसुर-फुसुर कर रहे हो? बोलने क्यों नहीं देते हो?

इस दौरान जब तेजप्रताप ने कहा कि गद्दी किसको मिलेगी, तब पीछे से कुछ आवाज आई. इस पर तेजप्रताप भड़क गए. उन्होंने कहा कि यही आप लोगों की डिमेरिट है. कुछ सिखाते हैं, तो सीखते क्यों नहीं? देखते नहीं यहां इतने सीनियर-सीनियर लोग बैठे हैं. सबसे सीनियर तो मैं हूं. इस मौके पर अब्दुल बारी सिद्दिकी और रघुवंश प्रसाद सिंह राम चंद्र पूर्वे जैसा नेता भी मौजूद थे.

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