CJI दीपक मिश्रा पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया नामंजूर

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उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को 'पद से हटाने' के लिए कांग्रेस और अन्य दलों की ओर से दिए गए नोटिस पर कानूनविदों से विस्तृत विचार विमर्श के बाद आज उसे नामंजूर कर दिया.
दरअसल सीजेआई पर महाभियोग लाने के लिए 20 अप्रैल को विपक्ष ने वेंकैया नायडू को 5 कारण गिनाए थे. जिसपर आज उन्होंने जवाब देते हुए प्रस्ताव को खारिज कर दिया.   
1.विपक्ष खासकर कांग्रेस ने सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ पहला आरोप खराब आचरण का लगाया था. कांग्रेस का आरोप है कि सीजेआई दीपक मिश्रा का व्यवहार उनके पद के मुताबिक नहीं है.
जवाब- इस पर राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू का कहना है कि दीपिक मिश्रा के खिलाफ CJI के पद पर रहते हुए, ऐसा कोई मामला नहीं आया है, जिससे उनके व्यवहार पर शक किया जाए. आपके पास भी आरोप के अलावा कोई सबूत नहीं है.

2. विपक्ष ने सीजेआई पर दूसरा आरोप प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट से फायदा उठाने का लगाया. विपक्ष का आरोप है कि सीजेआई दीपक मिश्रा ने इस मामले में दाखिल सभी याचिकाओं को प्रशासनिक और न्यायिक परिप्रेक्ष्य में प्रभावित किया.
जवाब- प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट केस की शुरुआती जांच में दीपक मिश्रा का नाम लिया जा रहा था. लेकिन व्यापक जांच के बाद इनकी भूमिका नजर नहीं आई. जहां तक याचिकाओं को प्रशासनिक और न्यायिक परिप्रेक्ष्य में जांच को प्रभावित करने की बात है कि इसके कोई साक्ष्य नहीं है.

3. विपक्ष ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर में मनमाने तरीके से बदलाव करने का आरोप लगाया है. विपक्ष का कहना है कि सीजेआई ने कई अहम केसों को दूसरी बेंच से बिना कोई वाजिब कारण बताए दूसरे बेंच में शिफ्ट कर दिया.
जवाब- सीजेआई दीपक मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर में मनमाने तरीके से बदलाव का आरोप गलत है. क्योंकि रोस्टर बनाने का अधिकार चीफ जस्टिस के पास होता है. नियम के मुताबिक CJI 'मास्टर ऑफ द रोस्टर' होते हैं. पिछले दिनों इस मुद्दे को उठाया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए इस मामले को सुलझा लेने का भरोसा दिया था. ऐसे में दीपक मिश्रा पर अब सवाल उठाना सही नहीं है.   

4. विपक्ष ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर अहम केसों के बंटवारे में भेदभाव का आरोप भी लगाया है. सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज बीएच लोया का केस सीजेआई ने सीनियर जजों के होते हुए जूनियर जज अरुण मिश्रा की बेंच को दे दिया था.
जवाब- जहां तक सुप्रीम कोर्ट के अंदर केसों के बंटवारे को लेकर सवाल है तो ये नियम के मुताबिक किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट का अपना नियम है जिसके तहत वो काम करता है. ऐसे मामलों में अगर सुप्रीम कोर्ट के अंदर से सवाल उठते हैं और निपटारा अंदर ही कर लिया जाता है तो ये न्यायपालिका की मजबूती और खूबसूरती को दर्शाता है

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