नागपुर में संघ ने लिया बड़ा फैसला, चौथी बार भैय्याजी जोशी को बनाया गया RSS का सरकार्यवाह

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर से सुरेश (भैय्याजी) जोशी को सरकार्यवाह बनाया है. भैय्याजी जोशी का यह चौथा कार्यकाल होगा. इससे पहले सह सरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को सरकार्यवाह बनाए जाने की अटकलें थीं.

लेकिन आज नागपुर स्थित मुख्यालय में आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में भैय्याजी जोशी को चौथी बार सरकार्यवाह बनाने की घोषणा की गई. संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद भैय्याजी जोशी नंबर दो की हैसियत रखते हैं.

नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय बैठक में सुरेश (भैय्याजी) जोशी को आगामी तीन वर्ष (2018-2021) के लिए सरकार्यवाह (General Secretary) चुना गया है. बैठक में सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने अपने कार्यकाल की समाप्ति की घोषणा की और उत्तर क्षेत्र संघचालक बजरंग लाल गुप्त को सरकार्यवाह के निर्वाचन की प्रक्रिया संपन्न करने का आग्रह किया.

इसके बाद बजरंग लाल ने मध्य क्षेत्र संघचालक अशोक सोहनी को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया. उन्होंने उपस्थिति प्रतिनिधियों से सरकार्यवाह के लिए नाम आमंत्रित किए. पश्चिमी क्षेत्र संघचालक जयंतीभाई भडेसिया ने सरकार्यवाह पद के लिए भैय्याजी का नाम प्रस्तावित किया. इसका समर्थन पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र संघचालक वीरेन्द्र पराक्रमादित्य, दक्षिण क्षेत्र कार्यवाह राजेन्द्रन, असम क्षेत्र कार्यवाह डॉ उमेश चक्रवर्ती और कोंकण प्रांत सह कार्यवाह विठल कांवले ने किया.

नए सरकार्यवाह के लिए अन्य नाम का प्रस्ताव न आने के कारण निर्वाचन अधिकारी ने सुरेशजी जोशी को आगामी तीन वर्ष (2018-2021) के लिए सरकार्यवाह फिर से घोषित कर दिया. इस बैठक में संघ और इससे जुड़े संगठनों के करीब 1500 प्रतिनिधि शामिल रहे. इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, बीजेपी के संगठन मंत्री राम लाल और बीजेपी महासचिव राम माधव भी शामिल थे.

नागपुर के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में भैय्याजी जोशी को दोबारा से सरकार्यवाह निर्वाचित करने का निर्णय लिया गया. भैय्याजी जोशी पिछले नौ साल से RSS के सरकार्यवाह के पद पर हैं. इस बार उनकी जगह ये जिम्मेदारी सह सरकार्यवाह दत्रात्रेय होसबोले को दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भैय्याजी जोशी की जगह होसबोले को जिम्मेदारी मिलने की चर्चा पिछली प्रतिनिधिसभा की बैठक में भी उठी थी, लेकिन तब भी भैय्याजी को ही इस पद पर बने रहने को कहा गया और मामला टल गया था.

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