मैंने पुरानी और नई दिल्ली दोनों देख ली मेट्रो की सवारी करके

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भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली को आज मैं देखनें के लिए अपने घर ग्राम छलेरा (नॉएडा) से निकला.  मैंने सबसे पहलें रुख किया बोटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन का वहां से मैंने द्धारका 21 मेट्रो स्टेशन के लिए मेट्रो में प्रवेश किया.

बता दे कि नॉएडा सिटी सेंटर से चलकर दिल्ली के द्धारका 21 मेट्रो स्टेशन तक जाती है. मैं लगभग 9 बजे बोटेनिकल गार्डन से द्धारका 21 के लिए बैठा. लगभग 11 बजे में द्धारका 21 पहुँच गया.

बोटेनिकल गार्डन से द्धारका 21 की तरफ जातें समय रास्ते में कई बड़े-बड़े स्टेशन भी आए. सबसे पहलें रास्ते में अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन आया. यहाँ अक्षरधाम मंदिर है. 

इसके बाद फिर प्रगति मैदान आया. बता दे कि प्रगति मैदान में हर साल बहुत बड़ा मेला लगता है. इसके बाद मंडी हाउस आया. मंडी हाउस में नएसटी(नेशनल ड्रामा स्कूल) है.

इसके बाद फिर राजीव चौक आया. राजीव चौक से आप येलो लाइन ब्लू लाइन दोनों बदल सकतें हो.

द्धारका 21 से मैने एअरपोर्ट हाईस्पीड लाइन से न्यू दिल्ली स्टेशन के लिए मेट्रो में बैठा. एअरपोर्ट हाईस्पीड लाइन वाली मेट्रो सिर्फ न्यू दिल्ली स्टेशन से द्धारका 21 तक चलती है. इसका किराया साधारण मेट्रो से ज्यादा है परंतु सेवाएँ भी उन्नत किस्म की है.

एअरपोर्ट लाइन से में न्यू दिल्ली मेट्रो स्टेशन उतरा. वहां से मैने राजीव चौक के लिए मेट्रो ली. मै लाल किला जाने के लिए राजीव चौक स्टेशन से दौ स्टेशन आगे चादनी चौक मेट्रो स्टेशन उतरा. इसके बाद में चांदनी चौक से लाल किला गया.

बता दे कि  लाल किला 1857 तक तकरीबन 200 सालो तक मुगल साम्राज्य का निवास स्थान था. मुगल शासनकाल में लाल किला मुख्य किले के रूप में था. ब्रिटिशो के भी लगभग सभी कार्यक्रम लाल किले में ही होते थे.

लाल किले का निर्माण 1648 में पाँचवे मुगल साम्राज्य शाहजहाँ ने अपने महल के रूप में बनवाया था. लाल किला पूरी तरह से लाल पत्थरो का बना होने के कारण उसका नाम लाल किला पड़ा. 

बता दे कि लाल किले के अन्दर काफी पुरानीं चीजें रखी है, जैसे कि पिस्तौल, सैनिकों की वर्दी, टेलीफोन, रेडियो, तलवार, धनुष, और भी पहले इस्तेमाल की जाने वाली चीजों की प्रदर्शनी लगी हुई है. 2007  में यूनेस्को ने लाल किले के महत्त्व और इतिहास को देखते हुए उसे वर्ल्ड हेरिटेज साईट घोषित किया. 

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