गणतंत्र दिवस पर प्लास्टिक के झंडे इस्तेमाल करने से आपको हो सकती है जेल

0090

 

अबकि बार गणतंत्र दिवस पर गृहमंत्रालय की तरफ से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों फ्लैग कोड का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है. गृहमंत्रालय की तरफ से सभी लोगों को यह भी आग्रह किया है कि वह प्लास्टिक के बने राष्ट्रीय झंडे का उपयोग न करें.

अगर कोई प्लास्टिक से बनें राष्ट्रीय झंडे का उपयोग करता है तो उसको क़ानूनी कार्यवाहीं का सामना करना पड़ सकता है. यहाँ तक की उसको जेल भी भेजा जा सकता है.

इतना ही नहीं एडवाजरी भी जारी की है एडवाजरी में कहा गया है कि राष्ट्रीय ध्वज देश के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को दर्शाता है और इसलिए इसे सम्मान प्राप्त होना चाहिए.

गृहमंत्रालय ने कहा कि उसका ध्यान इस और दिलाया गया है कि महत्वपूर्ण अवसरों पर कागज के तिरंगे की बजाय प्लास्टिक के तिरंगे का इस्तेमाल किया जा रहा है. 

परामर्श के मुताबिक, चूंकि प्लास्टिक से बने झंडे कागज के समान जैविक रूप से अपघटनशील नहीं होते हैं. ये लंबे समय तक नष्ट नहीं होते हैं.

सबसे बड़ी बात यह है कि ये वातावरण के लिए हानिकारक होते हैं. इसके अलावा, प्लास्टिक से बने राष्ट्रीय झंडों का सम्मानपूर्वक उचित निपटान सुनिश्चित करना एक समस्या है.

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा- दो के मुताबिक - कोई भी व्यक्ति जो किसी सार्वजनिक स्थान पर या किसी भी अन्य स्थान पर सार्वजनिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय झंडे अपमान करता है.

राष्ट्रीय झंडे के किसी भी भाग को जलाता है, विकृत करता है, विरूपित करता है, दूषित करता है, कुरूपित करता है, नष्ट करता है, कुचलता है.

राष्ट्रीय झंडे के प्रति अनादर प्रकट करता है या (मौखिक या लिखित शब्दों में, या कृत्यों द्धारा) अपमान करता है तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास से, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा.

परामर्श में कहा गया कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर भारतीय ध्वज संहिता के प्रावधान के अनुरूप, जनता केवल कागज से बने झंडों का ही प्रयोग करे. 

समारोह के पूरा होने के बाद ऐसे कागज के झंडों को न विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए. ऐसे झंडों का निपटारा उनकी मर्यादा के अनुरूप एकांत में किया जाए.  

Add comment


Security code
Refresh