दिल्ली पुलिस की मंजूरी नहीं मिलने के बाद भी जिग्नेश ने की रैली, उमर खालिद भी रहा मौजूद

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दिल्ली पुलिस से मंजूरी नहीं मिलने के बाद भी जिग्नेश मेवाणी, अखिल गोगोई, उमर खालिद व शहला राशिद समेत सैकड़ो युवा हुंकार रैली और जनसभा के लिए संसद मार्ग पहुंचे. मेवाणी की इस रैली में प्रशांत भूषण ने भी हिस्सा लिया.

दिल्ली पुलिस ने एनजीटी के आदेश का हवाला देते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट पर मेवाणी की रैली को मंजूरी नहीं दी. दिल्ली पुलिस ने बताया कि मेवाणी को रामलीला मैदान में रैली करने को कहा गया था. 

उमर खालिद ने रोहित वेमुला और चंद्रशेखर के बारे में बात करते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वह झोला उठाएंगे और चले जाएंगे, लेकिन वह हमारे सवालों का जवाब दिए बिना नहीं जा सकते. अब कोई एकलव्य नहीं कि आप अंगूठा काट लेंगे. सच यह है कि चंद्रशेखर देश के लिए खतरा नहीं है, बल्कि  हिंदू राष्ट्र की अवधारणा के लिए खतरा है.

उमर खालिद ने आगे कहा कि‍ सीएम योगी ने दलितों को जाकर शेंपू और साबुन बांटें, यह दलितों का अपमान है और इसी के खिलाफ चंद्रशेखर लड़ाई लड़ रहे हैं. 

सरकार रोहित का सामना नहीं कर पाई और उसे स्यूसाइड के लिए मजबूर किया. सरकार ने सोचा कि उसे उदाहरण बनाकर हमें डरा देंगे. लेकिन हम यह लड़ाई जीतेंगे और रोहित को इंसाफ दिलाएंगे. आप मुझेसे जिग्नेश मेवाणी से नफरत कर सकते हैं, लेकिन इससे नौकरियां नहीं पैदा हो जाएंगी. इससे सिर्फ आपका ब्लड प्रेशर बढ़ेगा.

उमर खालिद के अनुसार टीवी चैनल का शोर सही तस्वीर नहीं दिखाता है. साढ़े तीन साल पहले मोदी लहर के खि‍लाफ कोई विपक्ष नहीं था. अब विपक्ष है, उसका क्रेडिट युवाओं, महिलाओं, किसानों और लोगों के आंदोलन को जाता है.

जिग्नेश मेवाणी ने मिडिया  से कहा कि इस देश में एक निर्वाचित प्रतिनिधि को अगर युवाओं के लिए रोजगार, सामाजिक न्याय और दलितों व अल्पसंख्यकों के लिए बोलने नहीं दिया जाएगा. तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण क्या होगा. 

इलाहाबाद यूनिवर्सि‍टी छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष रिचा सिंह भी रैली मंं शामिल होने के लिए पहुंची. उन्होनें कहा कि उनको डर है कि छात्र राजनीति सिर्फ कैंपस तक सीमित नहीं है. आपको हमसे डर है तो चंद्रशेखर को रिहा करो, यह लड़ाई मुजफ्फरपुर से नागपुर तक लड़ेंगे.  

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