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राग द्वेष भूलकर मनाओ होली

होली 2019:  यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी, गाजियाबाद  के एम डी डॉ पी एन अरोड़ा जी ने होली के शुभ अवसर पर गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश एवं देश की जनता, आपके सम्मानित समाचार पत्र के पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली भारत का एक प्रमुख त्यौहार है जिसे हर धर्म में मनाया जाता है। अपनी इस सांस्कृतिक विरासत एवं त्योहार को सब लोग एक साथ मिलकर खूब धूम-धाम से इस त्यौहार को अपने परिवार व दोस्तों के साथ मनाएं । उन्होंने कहा कि इस दिन सभी एक दूसरे के साथ अपने गिले-शिकवे भुला, कुटिल भावनाएं एवं द्वेष मिटा कर, गुलाल लगाकर, गले मिलकर मिठाई खिलाये व त्यौहार की शुभकामनाएं दे। उन्होंने कहा कि 2019 की होली आत्मीयता एवं प्यार की होली बनाएं। होली के पौराणिक महत्त्व के बारे में बताते हुए डॉ अरोड़ा ने कहा कि भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप लेकर प्रहलाद की रक्षा के लिए होलिका बुआ (प्रहलाद की बुआ) को होली की आग में भस्मीभूत कर दिया और प्रहलाद के प्राणों की रक्षा की थी इसलिए होली मनाई जाती है।।।।

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पुराने चुनावी फॉर्मूले बदलेंगे और कई मिथक टूटेंगे

लोक सभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं और चुनावों कि घोषणा कभी भी हो सकती है सभी राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए अपनी अपनी जुगत में लगे हुए है। देश में नए नारों की भरमार है लेकिन भारतीय राजनीती का सबसे उपयोगी नारा और फार्मूला रहा है मुसलमानो को अपने साथ मिलाकर चुनाव जीतना लेकिन वह आज कि राजनीती में कही खड़ा हो पा रहा है या नहीं?  देश में लम्बे समय से मुसलमान और एक कोई भी बड़ी जाति का गठजोड़ चुनाव जीतने का बीज मंत्र रहा है लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में इसमें काफी बदलाव हुए है। 
 
मुस्लिम वोट के महत्त्व पर पहली बार प्रश्न चिन्ह तब लगा जब भारतीय जनता पार्टी ने २०१४ के चुनावों में ८० में से सहयोगीयों के साथ ७३ सीटें जीती और लगभग १७ फीसद मुसलमानों कि जनसँख्या वाले प्रदेश  में एक सीट पर भी मुसलमान दावेदार को नही उतारा। लेकिन ऐसा नहीं था कि जिन सीटों पर भाजपा की हार हुई वहां मुसलमान ज्यादा थे बल्कि ऐसी सभी सीटों पर जहाँ मुसलमानों के संख्या ज्यादा थे भाजपा ने जीत हासिल की यहाँ तक की एकमात्र सीट रामपुर जहां मुसलमान हिन्दुओं से ज्यादा हैं वहां पर भी भाजपा  ने चुनाव जीता कमोवेश यही हाल बिहार का भी रहा।  इन दोनों प्रदेशो में मुसलमानो की जनसँख्या १६-१७ फीसद के आसपास है। 
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आम आदमी पार्टी का शिक्षा के प्रति रुख नौनिहालों के मुस्तक़बिल के लिए खतरनाक

अन्ना आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी ने देश के लोगो को एक उम्मीद की किरण दी थी और दिल्ली को ऐसे सब्जबाग दिखाए कि पूरा शहर उनके पीछे खड़ा हो गया हालाँकि इसमें कुछ गलत भी नहीं था।  आम आदमी पार्टी ने जिस तरह से भ्रष्टाचार से लेकर बाते कहीं और दिल्ली के विकास का खाका दिखाया उसने दिल्ली में इस पार्टी को एक मैंडेट दिया जिसका दोहराया जाना नामुमकिन है। लेकिन दिल्ली के लोगो को  भरोसे के बदले क्या मिला? हर मामले में दिल्ली के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे है लेकिन शिक्षा को लेकर किया गया आम आदमी पार्टी का वादा न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि देश और दिल्ली के मुस्तकबिल के लिए बेहद खतरनाक है और इसे समझना जरुरी है।

बात स्कूलों से शुरू करते है। आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में ५०० नए स्कूल बनाये जाने की बात कही थी जिससे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के स्कूलों  वरीयता दी जानी थी जिसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करना था लेकिन दिल्ली सरकार जब १४ फ़रवरी अपना ४ साल का कार्यकाल पूरा करेगी तो लगभग तीन साल के उपलब्ध आकड़ो के हिसाब से दिल्ली में अब तक सिर्फ ६ नए स्कूल अस्तित्व में आ सके है वास्तव में नए तो सिर्फ ३ स्कूल ही है ३ को पुनर्निर्मित किया जा रहा है।  दावे से इतर १०० स्कूल प्रतिवर्ष के जवाब में एक स्कूल प्रतिवर्ष भी नहीं बन सका है। हालाँकि सरकार तीन साल में ५६९५ कक्षाओं के निर्माण की बात कह रही है जो प्रतिवर्ष के हिसाब से १८९८ हुई। आम आदमी पार्टी कि पुरजोर आलोचना का शिकार रही गुजरात सरकार ने वर्ष १९९८-९९ से २०११-१२ के बीच औसत ६६०३ प्रति वर्ष कक्षाओं की दर से ९२४५३ कक्षाएं निर्मित करवाई।

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बिहार स्पेशल! दही चुड़ा पे एकठो बतकही

याद है न, कल दही-चुड़ा है! पता नही, आजकल पटना में लोग दही घर में जमा रहे हैं या डब्बे वाली दही से ही काम चला ले रहे है दही चुड़ा के दिन भी। एक समय होता था, जब खिचड़ी के एक-दो हफ़्ते पहले से ही पटना में दुध बटोरने का कार्य क्रम चालु हो जाता था और बड़े दुख से दुध की बटोरी मात्रा को धीमी आँच पे आधा कर दिया जाता था। उसके बाद उस दुध में 'ज़ोरन' डाल कर कम्बल से ढक कर छोड़ दिया जाता था कम से कम दो दिनों तक। क्या मजाल जो कोई आस पास फटकने की हिम्मत भी कर पाए उस ख़ास पतीले के! शायद किसी के पैरों की कंपन ही 'दुध' को 'दही' न बनने दे। और अगर 'दही' नही अच्छी बनी, तो फिर देखने लायक होती थी, घर की मालकिन का चेहरा, जैसे वो ज़िन्दगी में कितनी बड़ी बाज़ी हार गयीं हों।

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पुलिस ने बीती रात बुलंदशहर हिंसा का मुख्य आरोपी योगेश राज को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में कथित गो हत्या की घटना को लेकर पिछले साल 3 दिसंबर को भड़की हिंसा का आरोपी और बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज गिरफ्तार हो गया है. हिंसा की घटना के एक महीने बाद वह पुलिस के शिकंजे में आया है. भीड़ द्वारा हिंसा की इस घटना में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी. योगेश राज पर हिंसक भीड़ को भड़काने का आरोप है.

पुलिस ने बीती रात योगेश को गिरफ्तार किया. बता दें कि योगेश राज बजरंग दल का जिला संयोजक है. हालांकि, पुलिस ने योगेश की गिरफ्तारी का खुलासा नहीं किया है. जानकारी के मुताबिक हिंसा के मुख्य आरोपी योगेश की गिरफ्तारी पर एसएसपी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं.

पिछले साल 3 दिसंबर को भड़की हिंसा के दौरान पुलिस निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह पर कुल्हाड़ी से हमला करने के आरोप में बीते सोमवार को यूपी पुलिस ने कलुआ नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक इम मामले में अब तक 33 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.