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बाल कल्याण के लिए बजट में 16 % वृद्धि का कैलाश सत्यार्थीचिल्ड्रन्स फाउंडेशन ने किया स्वागत

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापितसंस्था कैलाश सत्यार्थी चिल्डन फाउडेंशन नए केंद्रीय बजट मेंबच्चों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए विभिन्नसकारात्मक कदमों की सराहना करता है। हमें बेहद प्रसन्नता हैकि कुल बजट आवंटन में बच्चों के लिए 16 प्रतिशत की वृद्धि हुईहै। इसके अलावा (सेबी) के तहत सोशल स्टॉक एक्सचेंज कीस्थापना सामाजिक सेवा संगठनों को बड़े पैमाने पर समाज केकल्याण के लिए धन जुटाने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन प्रदानकरेगा।
 
बाल संरक्षण सेवाओं (सीपीएस) के लिए आवंटन को 2018-19में 725 करोड़ रुपये से 2019-20 1500 करोड यानि तकरीबनदोगुना करने से पीड़ित बच्चों को अधिक सहायता मिलेगी। हमसामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत बाल कल्याणके लिए बजट में 89 प्रतिशत की वृद्धि का स्वागत करते हैं, इसकेअलावा, छात्रवृत्ति के रूप में पिछड़ी जाति के बच्चों को अधिकवित्तीय सहायता से राहत मिलेगी। हम श्रम कानूनों कोसुव्यवस्थित करने और देश में श्रम न्यायालयों की स्थापना के लिएभी जोर देते हैं।

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उच्च रक्तचाप एक साइलंट किलर है, हर तीसरा भारतीय इस समस्या का शिकार है

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाजियाबाद के प्रबंध निदेशक डॉ पी एन अरोड़ा जी ने बताया कि उच्च रक्तचाप के प्रति जागरूकता लाने के लिए हर साल 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मनाया जाता है। उच्च रक्तचाप या हाई बीपी की समस्या पिछले कुछ सालों में बढ़ी है और हृदय रोगों, किडनी के निष्क्रिय होने जैसी अनेक समस्याओं के पीछे रक्तचाप अधिक होना प्रमुख वजह है। कई रोगियों को अधिक रक्तचाप का पता नहीं चलता क्योंकि कोई खास लक्षण नहीं होता। सिर में दर्द, देखने में दिक्कत, नींद सही से नहीं आने जैसी समस्याओं की जांच के लिए जब लोग जाते हैं तो पता चलता है कि रक्तचाप बढ़ा हुआ है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाजियाबाद के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉक्टर असित खन्ना जो कि एक वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट हैं एवं अभी तक 10,000 से ज्यादा एंजियोग्राफी कर चुके हैं एवं 4100  से ज्यादा एंजियोप्लास्टी भी कर चुके हैं, अपने वृहद् कार्यकाल के अनुभव से  डॉ खन्ना ने जानकारी देते हुए कहा कि इस वर्ष की थीम " नो योर नंबर्स विथ ए गोल ऑफ़ इंक्रीसिंग हाई ब्लड प्रेशर (बी पी) अवेयरनेस  इन  आल  पॉपुलेशन्स  अराउंड  द  वर्ल्ड "है । बताया, ‘उच्च रक्तचाप एक साइलंट किलर है। इसके अपने कोई विशेष लक्षण नहीं होते। कई बार रोगियों को सिर में दर्द या चक्कर आने की शिकायत होती है, लेकिन अधिकतर मस्तिष्क, हृदय, किडनी और आंखों पर असर होता है।’  डॉ खन्ना बताते हैं , ‘रोजाना 25 से 30 मिनट की कसरत, कम नमक का प्रयोग, कम वसा वाले भोजन के इस्तेमाल से मानसिक तनाव से बचा जा सकता है। इसका बीपी रोगियों पर सकारात्मक असर दिखाई देता है। बीपी रोगियों को उपचार और दवाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए।’

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विश्वभर में प्रत्येक 11 में से एक वयस्क मधुमेह से पीड़ित है.

गाजियाबाद: आज के समय की भयावह बीमारियों में से एक मधुमेह रोग पर डॉक्टरों ने यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी में एक मेडिकल सेमिनार में की चर्चा
 
मेडिकल सेमिनार का उद्घाटन यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की डायरेक्टर श्रीमती उपासना अरोड़ा जी ने किया, इस कांफ्रेंस में ट्रांस हिंडन, गाज़ियाबाद के 50  डॉक्टरों ने भाग लिया।  इस सेमिनार का आयोजन यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बी के सभागार में किया गया,  वरिष्ठ मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अमित छाबड़ा ने सेमिनार को सम्बोधित किया ।
 
बुधवार को आयोजित मेडिकल कांफ्रेंस में डायबिटीज के क्षेत्र में आई एक नई दवाई एस जी एल टी 2 इन्हिबिटर की उपलब्धियों, जिससे मरीजों को किडनी एवं हृदय के ऊपर पड़ने वाले प्रभावों से बचाया जा सकता है, तथा इसी दवाई से ब्लड प्रेशर में भी आराम मिल जाता है और मोटापे के मरीजों में वजन भी कम होने लगता है पर चर्चा हुई।शोधकर्मियों का मानना है कि उन्होंने इस बीमारी से जुड़ी और भी अधिक जटिल तस्वीर सबके सामने लाने में कामयाबी प्राप्त की है और इससे मधुमेह के उपचार का तरीका बदल सकता है.
 
अगर डॉक्टरों की माने तो उनका कहना है कि मधुमेह यानी डायबिटीज़ असल में पांच अलग-अलग बीमारियां हैं और इन सभी का इलाज भी अलग-अलग होना चाहिए, डायबटीज़ शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाने पर होती है, और इसे सामान्यतः दो प्रकारों में बांटा गया है टाइप-1 और टाइप-2. 
 
विश्वभर में प्रत्येक 11 में से एक वयस्क मधुमेह से पीड़ित है. मधुमेह की वजह से दिल का दौरा पड़ना, स्ट्रोक, अंधापन और किडनी फेल होने के खतरे बने रहते हैं, इस हेतु चर्चा में वरिष्ठ वरिष्ठ ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ असित खन्ना धीरेंद्र सिंघानिया वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सुमन तो चैटर्जी कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अभिषेक यादव गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर क्यू  हसनैन वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट डॉक्टर के के पांडे डॉक्टर अर्जुन खन्ना डॉक्टर अंकित सिन्हा ने विशेष तौर पर भाग लिया और अपने अपने विभाग  से संबंधित मधुमेह से ग्रसित मरीजों  एवं बीमारियों में प्रयोग होने वाली दवाओं के दुष्प्रभावों से मरीजों के बचाव के बारे में चर्चा की सभी डॉक्टरों का उद्देश्य था की डायबिटीज के मरीजों को दवाइयों के दुष्प्रभाव से कैसे बचाया जा सके
 कॉन्फ्रेंस में डॉक्टर बीएस त्यागी डॉ रमाकांत गुप्ता डॉ पीएन चौधरी डॉक्टर आजाद डॉक्टर कोटलिया डॉ अश्वनी कंसल डॉ अभिनव पांडे डॉ रुचि डॉ राहुल शुक्ला डॉक्टर सुनील डागर डॉ अनुज अग्रवाल डॉक्टर राज भूषण गौरव पांडे एवं अनुपम भी मौजूद थे
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राग द्वेष भूलकर मनाओ होली

होली 2019:  यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशांबी, गाजियाबाद  के एम डी डॉ पी एन अरोड़ा जी ने होली के शुभ अवसर पर गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश एवं देश की जनता, आपके सम्मानित समाचार पत्र के पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली भारत का एक प्रमुख त्यौहार है जिसे हर धर्म में मनाया जाता है। अपनी इस सांस्कृतिक विरासत एवं त्योहार को सब लोग एक साथ मिलकर खूब धूम-धाम से इस त्यौहार को अपने परिवार व दोस्तों के साथ मनाएं । उन्होंने कहा कि इस दिन सभी एक दूसरे के साथ अपने गिले-शिकवे भुला, कुटिल भावनाएं एवं द्वेष मिटा कर, गुलाल लगाकर, गले मिलकर मिठाई खिलाये व त्यौहार की शुभकामनाएं दे। उन्होंने कहा कि 2019 की होली आत्मीयता एवं प्यार की होली बनाएं। होली के पौराणिक महत्त्व के बारे में बताते हुए डॉ अरोड़ा ने कहा कि भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप लेकर प्रहलाद की रक्षा के लिए होलिका बुआ (प्रहलाद की बुआ) को होली की आग में भस्मीभूत कर दिया और प्रहलाद के प्राणों की रक्षा की थी इसलिए होली मनाई जाती है।।।।

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पुराने चुनावी फॉर्मूले बदलेंगे और कई मिथक टूटेंगे

लोक सभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं और चुनावों कि घोषणा कभी भी हो सकती है सभी राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए अपनी अपनी जुगत में लगे हुए है। देश में नए नारों की भरमार है लेकिन भारतीय राजनीती का सबसे उपयोगी नारा और फार्मूला रहा है मुसलमानो को अपने साथ मिलाकर चुनाव जीतना लेकिन वह आज कि राजनीती में कही खड़ा हो पा रहा है या नहीं?  देश में लम्बे समय से मुसलमान और एक कोई भी बड़ी जाति का गठजोड़ चुनाव जीतने का बीज मंत्र रहा है लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में इसमें काफी बदलाव हुए है। 
 
मुस्लिम वोट के महत्त्व पर पहली बार प्रश्न चिन्ह तब लगा जब भारतीय जनता पार्टी ने २०१४ के चुनावों में ८० में से सहयोगीयों के साथ ७३ सीटें जीती और लगभग १७ फीसद मुसलमानों कि जनसँख्या वाले प्रदेश  में एक सीट पर भी मुसलमान दावेदार को नही उतारा। लेकिन ऐसा नहीं था कि जिन सीटों पर भाजपा की हार हुई वहां मुसलमान ज्यादा थे बल्कि ऐसी सभी सीटों पर जहाँ मुसलमानों के संख्या ज्यादा थे भाजपा ने जीत हासिल की यहाँ तक की एकमात्र सीट रामपुर जहां मुसलमान हिन्दुओं से ज्यादा हैं वहां पर भी भाजपा  ने चुनाव जीता कमोवेश यही हाल बिहार का भी रहा।  इन दोनों प्रदेशो में मुसलमानो की जनसँख्या १६-१७ फीसद के आसपास है।