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दुनिया के महान क्रिकेटर एबी डिविलियर्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का किया ऐलान

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान और विस्फोटक बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने सभी को चौंकाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया.

उन्होंने हाल ही में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के साथ लीग में हिस्सा लिया था. क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक वह जुलाई में श्रीलंका के साथ होने वाली द्विपक्षीय सीरीज में नहीं खेलेंगे.

डिविलियर्स को मौजूदा समय के महान बल्लेबाजों में गिना जाता है. वह दक्षिण अफ्रीका के कप्तान भी रह चुके हैं. उन्होंने अपने देश के लिए 114 टेस्ट मैचों की 91 पारियों में 50.66 की औसत से 8765 रन बनाए हैं, जिसमें 22 शतक और 46 अर्धशतक शामिल हैं. टेस्ट में उनका सर्वोच्च स्कोर 278 है.

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कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में सभी विपक्षी दलों ने दिखाई एकजुटा

कर्नाटक में कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने विपक्ष के तमाम नेता पहुंचे और एकजुटता दिखाई. ऐसी विपक्षी एकता इससे पहले कभी नहीं देखने को मिली. ये नजारा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा लगाए गए आपातकाल के बाद कांग्रेस के खिलाफ जनता पार्टी के साथ आए दलों की याद ताजी करा रहा था.

लेकिन सवाल यह है कि विपक्षी नेताओं का ये साथ कितने दिनों तक रहेगा? क्या साल 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ विपक्ष इसी तरह एकजुट होकर सामना करेगा या फिर उससे पहले ही अपने बोझों तले दबकर बिखर जाएगा?

मालूम हो कि कर्नाटक चुनाव नतीजों के बाद 21वें राज्य के रूप में बीजेपी ने सरकार बनाने के लिए कदम बढ़ाया, तो कांग्रेस-जेडीएस ने आपस में हाथ मिला लिया. इतना ही नहीं, विपक्ष के बाकी दल उनके समर्थन में खड़े हो गए.आपको बता दें कि कर्नाटक में 222 सीटों के लिए हुए चुनावों में बीजेपी को 104 सीटें मिलीं. कांग्रेस को 78 और जेडी(एस) को 37 और बहुजन समाज पार्टी को 1 सीट मिली थी. 

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शत्रुघ्न सिन्हा को बीजेपी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ाएंगी ममता बनर्जी

2019 में होने वाले आम चुनाव में अभी एक साल का वक्त बचा है, लेकिन देश की सियासत अभी से उस चुनावी माहौल में पहुंच गई दिखती है. विपक्षी दल जहां नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने के लिए लामबंद होने की कोशिशों में जुटे हैं तो वहीं बीजेपी भी अपनी तैयारियों में जुट गई है. साथ ही इस आम चुनाव को लेकर अभी से ढेरों तरह की चुनावी कयासों का बाजार गरम हो गया है.

केंद्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी ) के कई सांसदों के बारे में माना जा रहा है कि वो अपने ही दल में खुश नहीं हैं और अगले आम चुनाव में पार्टी का साथ छोड़कर उसके खिलाफ ही चुनावी समर में ताल ठोंक सकते हैं.

इन बागी नेताओं में सबसे आगे शत्रुघ्न सिन्हा का नाम आता है, हालांकि वह अभी भी पार्टी में बने हुए हैं, लेकिन वह मोदी सरकारऔर पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं. ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि वह अगले चुनाव तक पार्टी का साथ छोड़कर उसके ही खिलाफ जा सकते हैं.

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कर्नाटक में डिप्टी सीएम को लेकर कांग्रेस और JDS में मंथन

कर्नाटक के राजनीतिक नाटक का पटाक्षेप क्या बुधवार को एचडी कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के साथ हो जाएगा? शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं. हालांकि ये अभी रहस्य ही बना हुआ है कि कुमारस्वामी के साथ मंत्री के तौर पर और कौन- कौन शपथ लेगा? जेडीएस से कितने मंत्री होंगे और कांग्रेस से कितने?

जेडीएस और कांग्रेस दोनों के ही टॉप नेता चाहते तो हैं शपथ ग्रहण समारोह बिना किसी अड़चन के संपन्न हो लेकिन ये भी सच है कि सरकार में ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी पाने के लिए दोनों तरफ से रस्साकशी जारी है.

इससे इन अटकलों को बल मिला है कि मंत्रिमंडल में कांग्रेस और जेडीएस दोनों ही अपने ज्यादा से ज्यादा मंत्री देखना चाहते हैं. सोमवार दोपहर तक 20:14  फॉर्मूले की बात सुनी जा रही थी. जिसके तहत 20 मंत्री कांग्रेस के और 14 मंत्री जेडीएस के बनाए जाने थे, लेकिन अभी पक्के तौर पर कुछ सामने नहीं आया है.

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अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और JDS के गठबंधन को बताया अपवित्र

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कर्नाटक में अपनी सरकार गिर जाने पर सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने इस दौरान कर्नाटक की जनता का आभार जताया. शाह ने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के आशीर्वाद से बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनी है.

अमित शाह ने कहा कि हमारी पार्टी पिछले चुनाव की 40 सीटों के मुकाबले इस बार 104 सीटें जीत कर आई है. उन्होंने कहा कि 5 साल की कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार, कुशासन और तुष्टिकरण की नीतियों को उजाकर करना ही हमारी पार्टी का मकसद रहा. कर्नाटक में किसानों की आत्महत्या, कमजोर कानून व्यवस्था भी विफल सरकार की परिचायक बनी है.