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कोरोना संकट में लॉकडाउन के दौरान घर में रखें इन बातों का ख्याल

New Delhi: कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है, ऐसे में आपका घर में रहना आपको महफूज रखेगा। अपने परिवार के बुजुर्गों और बच्चों का खास ख्याल रखते हुए अपनी पाजिटिविटी को बनाए रखें क्योंकि यह सकारात्मकता ही आपको कोरोना वायरस से लड़ने की ताकत देगा। तो आइए हम आपको कुछ खास बातें बताते हैं जिन्हें अपना कर आप न केवल इस महामारी से बचेंगे बल्कि जीवन में इन स्मृतियों को सजो कर रख सकेंगे।

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चैत्र नवरात्र, घर में करें देवी की आराधना

New Delhi: दुनिया भर में कोरोना वायरस का खतरा बढ़ा हुआ है, ऐसे में हम सभी डरे हुए हैं। चैत्र नवरात्र शुरू होने वाला है, इसमें हम सभी अपने आराध्या देवी को घर में रह कर प्रसन्न करने का प्रयास कर सकते हैं, तो आइए हम आपको कुछ खास तरीके बताते हैं जिनके द्वापा घर में रहकर नवरात्र में नौ देवियों की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्र के पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री का रूप अद्भुत होता है, उन्हें वृषारूढ़ा और उमा के नाम से भी जाना जाता है। पहले दिन कलश स्थापना भी की जाती है। इस बार कलश की स्थापना का मुहूर्त 25 मार्च 2020 को सुबह 6 बजकर 19 मिनट से सुबह 7 बजकर 17 मिनट तक है। घर में मंदिर के पास किसी पवित्र स्थल पर कलश स्थापित करें। कलश के पास नौ दिन तक अखंड ज्योति जलाते रहें।
कलश स्थापना करने के बाद आप हमेशा इसका ख्याल रखें। कलश का मुंह कभी भी खुला न रखें। हमेशा कलश को किसी बर्तन से ढक कर रखें और बर्तन को कभी भी खाली नहीं छोड़े उसमें चावल भर दें। चावल के बीच में एक नारियल भी रखें। पूजा के बाद यहां लौंग-इलायची रख दें।

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इस होली कैमिकल रंगों से करें बचाव, घर में बनाएं कुदरती रंग

                                                  

होली आने वाली है! बाजार में रंग-गुलाल से दुकानें सज गयी हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाले कैमिकल वाले रंग आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। तो आइए हम आपको कैमिकल वाले रंगों से बचाव और कुदरती रंगों को बनाने की विधि के बारे में बताते हैं।

होली खेलते के बाद बहुत से लोगों को कई तरह की हेल्थ प्राब्लम का सामना करना पड़ता है। इनमें कुछ मरीजों को स्किन की एलर्जी, निमोनिया और सांस की परेशानी ज्यादा होती है। लेकिन कुछ लोगों को स्किन की समस्या का सामना करना पड़ता है। खासतौर से बच्चों की स्किन बहुत नाजुक होती है उस पर तरह-तरह के कैमिकल वाले रंग का बहुत बुरा असर होता है इससे बच्चों को तरह-तरह की एलर्जी हो जाती है। इस एलर्जी और सांस की बीमारियों से बचने के नन्हें-मुन्नों के साथ सावधानी बरतें ।  

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हिन्दू धर्म में होलिका दहन का है खास महत्व

होली का त्यौहार होलिका दहन से शुरू होता है और होलिका दहन की तैयारियां बहुत पहले से शुरू हो जाती हैं तो आइए हम आपको होलिका दहन के बारे में कुछ रोचक बातें बताते हैं।

एक महीने पहले शुरू हो जाती है होलिका दहन की तैयारी   

वैसे तो होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होता है लेकिन इसकी तैयारी माघ महीने की पूर्णिमा से ही शुरू हो जाता है। इसके लिए  एक महीने पहले गांव या शहर के किसी खास चौराहे पर गुलर के पेड़ की लकड़ी को रख दिया जाता है जिसे होली का डंडा गाड़ना कहते हैं। उसके बाद एक महीने तक धीरे-धीरे उस पर उपले, लकड़ियां, डंडे और झांड़िया इकट्ठी की जाती हैं। होलिका में गोबर के उपलों की माला भी बनायी जाती है जिसे महिलाएं घर में कई दिन पहले से बनाना शुरू कर देती हैं।

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महाशिवरात्रि पर मदार के फूलों से करें पूजा, मिलेगा मोक्ष

महाशिवरात्रि हिन्दुओं का खास त्यौहार है। इस दिन लोग पूजा-अर्चना कर शिव जी को प्रसन्न करते हैं। तो आइए हम आपको महाशिवरात्रि का महत्व तथा पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

शिवरात्रि को महाशिवरात्रि क्यों कहा जाता है।

हर साल साधना के लिए शरद पूर्णिमा की मोहरात्रि, दीवाली की कालिरात्रि तथा महाशिवरात्रि की सिद्ध रात्रि महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस तीन अवसरों पर पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूर्ण होती है। हर महीने की कृष्ण पक्ष के दिन आने वाली त्रयोदशी को शिवरात्री कहा जाता है। लेकिन फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को महाशिवरात्रि कहा जाता है। यह महाशिवरात्रि साल की अन्य शिवरात्रि से खास होती है क्योंकि इसी दिन शिव जी तथा पार्वती का विवाह भी सम्पन्न हुआ था।